रफ़्ता रफ़्ता ….

रफ़्ता रफ़्ता आसमान ज़मीन पर झुकेगा |

रोशन होगा शमशान भी रफ़्ता रफ़्ता ||

 

शर्माना सीखेगा चाँद भी किसी दिन |

चांदनी मेरे घर भी बरसेगी रफ़्ता रफ़्ता ||

 

सीने की कसक ने यहाँ सोने नही दिया|

सुकून भी उतरेगा फलक से रफ़्ता रफ़्ता ||

 

पतझड़ का मौसम है अरसों से मेरे बगीचे  में |

बहार बेशुमार आएगी गुलशन में रफ़्ता रफ़्ता ||

 

हवा ने अभी ज़रा सा ही तो रुख बदला है |

पूरी की पूरी हवा भी बदलेगी रफ़्ता रफ़्ता ||

 

©Avdhesh

 

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I was boycotted

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I was boycotted
When I reached at the top
I was boycotted
When I got the hidden treasure
I smiled in the arms of fortune
I hoped to be happy either
But sudden I was boycotted
I  bathed under the magical fountain
Surpassed the infinite vertical mountain
I was playing the flute of love happily
But sudden I was boycotted.
I was boycotted
Because I ruined the rituals
That no one can break
But I broke
Hence
I was boycotted.

©Avdhesh

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छोड़ दूं

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आज रहबर नहीं है तो क्या राह छोड़ दूँ।
पास मरहम नहीं है तो क्या आस छोड़ दूँ।।

वो मिलने आएगा ये बात आज तक याद है मुझे।
मैं अब जीना छोड़ दूं या उसकी याद छोड़ दूं।।

मैं ऐसा भूला उसको कि आशियाना पीछे रह गया।
उसे आज थोडा दूर छोड़ दूं या पास छोड़ दूं।।

आज महफ़िल में वहां राज़-ए-इश्क़ खुलेगा शायद।
मैं उनके हिस्से जीत लूं या अपनी मात छोड़ दूं।।

चाहे हर बार मुकरते है वो अपनी कही जुबान से।
इसी डर से घबरा के क्या मैं बात छोड़ दूं।।

होना था जो हो रहा है, मेरा मुस्कुराना खो रहा है।
अब मुस्कुराना भूल जाऊं या अफ़्लात छोड़ दूं।।

©Avdhesh

Celebration 🏆

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Hi fellow Bloggers !
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This has been an awesome journey in blogging world. I met with many talented &  creative people. Some of them are really sound while reading. Naming such Bloggers will be just like showing mirror to sun so I am not mentioning any specific name.
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So I heartily thank  all great personalities that they somehow managed them to read my unworthy posts.
So i am celebrating this little achievement that came in my kitty.
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Now I have 100 followers !
Looking forward for more lovely followers .

With best regards
Avdhesh💙

माँ

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जब दुख के बादल तुमसे ज्यादा ऐंठे ।
तब माँ के आँचल को सर पर लपेटें ।।

गुलशन जो आज इतरा रहा है खूबसूरती पर ।
पहले अपनी माँ का शुक्रिया अदा कर के लौटे ।।

हसीनों की ज़ुल्फ़ों तले क्या मिला है किसी को ।
खुशी चाहने वाला बेझिझक माँ का दामन ओढ़े ।।

क्या सूफ़ी और क्या पंडित के पैर पकड़ता है ।
गर जन्नत की तलब है तो माँ के पैर धो लें ।।

लगता है कि तकलीफों ने अपना कद बढ़ा लिया है ।
उन्हें कहो कभी मेरे माँ के सिरहाने आकर बैठें ।।

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© Avdhesh