She

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She is Beautiful , no objection
She is Queen , no objection
She is Fairy , no objection
She is Diva , no objection
She is Special , no objection
She is Lovely , no objection
She is Princess , no objection
She is Belle , no obection
She is Pretty , no objection
She is Exquistive , no objection
She is Radiant , no objection
She is Cute , no objection
She is Adorable , no objection
She is Gorgeous , no objection
She is Stunning , no objection
She is Hot , no objection
She is Alluring , no objection
She is Charming , no objection
She is Dazzling , no objection
She is Candy , no objection
She is Luscious , no objection
She is Marvelous , no objection
She is Goddess , no objection
.
She is ( endless adjectives i am not able to recall) , no objection at all.
.
.

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But i am
True
Pure
At heart
Still
In such nasty world
Despite being a Boy
It matters .

Avdhesh 😶

Blessed😀

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I thank all the readers & fellow bloggers to make me blessed with this tiny achievement.
Though it is tiny but it is worthy for me .
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Hope you will be blessing me in the same way ahead.
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Kuch is trah se maine kaha.
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” छोटी हो भले ही लेकिन
  सफलता सुकून जरूर देती है”

…देखा है

 

ए हसीं , हुस्न पर इतना गुरूर नहीं अच्छा |

के मैंने चाँद को भी झुलसते देखा है ||

वो जुगनू जो कभी ज़मीन पर उतरा ही न था |

उसे चुपके से मैंने अपने पर बदलते देखा है ||

जो नज़र पहली दफा में ही  गुलाम बना लेती थी |

उस नज़र को भी  मैंने खामोश होते देखा है ||

जो बेजज्बाती होने में मशहूर थे बड़े |

उन्ही लोगों को मैंने खुदकुशी करते देखा है ||

ताउम्र जिन्होंने हाथ में तलवार पकडे रखी |

उनको भी मैंने नाज़ुक ग़ुलाब पकडे देखा है ||

जो लोग उर्दू से कोई वास्ता नहीं रखते |

उनको भी मैंने बड़े शायर बनते देखा है ||

-Avdhesh

 

पता ही न चला

बड़े सलीके से लोग यहाँ बड़े हुए कि पता ही न चला |
दामन कब दागों से भरा कि पता ही न चला ||

एक परछाई की आस में बैठा रहा मैं उम्र भर |
कब आतिश-ए-इश्क़ से जल बैठा , पता ही न चला ||

होशियारी का लबादा ओढा तो ओढा सदियों तक |
कब इक पल में सब ख़ाक हुआ , पता ही न चला ||

जब छुपा के रखा तो मजाल है की ज़बान खुल जाये |
और कब सरेआम करने लगा ,पता ही न चला ||

सच के मामले में मैंने गाँधी का दामन थामा |
और कब दुनिया झूठी हुई , पता ही न चला ||

कोई किसी कि फिक्र बेवजह नहीं करता यहाँ |
मैं क्यों यहाँ फ़रिश्ता बनने लगा , पता ही न चला ||

तरक्की की राह में हर फालतू चीज़ छोड़ी मैंने |
कब कोई मेरा दूर हुआ मुझसे , पता ही न चला ||

फलक की बुलंदियों पर नज़र गड़ाई रखी हमेशा |
कब पैरों तले ज़मीन खिसकी , पता ही न चला ||

यहाँ दिल निकाल के रखो तो भी कोई परवाह नही करता |
इक नज़राने को क्यूँ संभाला मैंने , पता ही न चला ||

मेरी आँखों के सामने उन्होंने आसमान छुआ है |
और कब इतने बड़े हुए , पता ही न चला ||

वो जो कहते तो कामयाबी का सेहरा उनके सर बंधवाता |
तरक्की की राह कब छोड़ी उन्होंने , पता ही न चला ||

ख़ूबसूरत गुलों के बीच इक भंवरा बेदाग़ रहा आज तक |
इक सादा फूल कब आँखों में बसा , पता ही न चला ||

अब आग़ लगती है उनके आँचल में मेरे अल्फाजों से तो बेशक़ लगे |
उस शम्मा की लौ से मैं भी कब का जल गया , पता ही न चला ||

Avdhesh